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Saturday, May 5, 2018

पहला पन्ना -जिंदगी की किताब से

ज़िन्दगी , एक किताब ही तो है ... जिसके कुछ पन्ने खट्टी-मीठी दास्तानों से भरे हैं तो कुछ पन्नों में कड़वाहट की सीलन भी बसी है. कभी किसी ने बड़ी मोहब्बत  से खुशियों का गुलिस्ता भेंट किया, तो उसका एक फूल ज़िन्दगी के किसी पन्ने में बड़े नाज़ों से सहेज कर रख लिया, और कभी किसी से लगायी उम्मीदें टूट कर कांच की तरह बिखरीं कि आँसुंओं के सेलाब से अनगिनत पन्ने गीले भी हो गए।  कहना गलत होगा की इस किताब का ताल्लुक सिर्फ  मुझसे  है, अजी बेशुमार किरदार भी इससे वास्ता रखते हैं।  अगर इन किरदारों की  मेहरबानी ना होती तो कलम से ना कहानियाँ निकलती और ना ही कविताओं से बहती भावनाएँ।  हाँ , ये बिलकुल सही है की ज़िन्दगी की ये कितबिया तो ढेरों अनुभवों के पन्नों से लबरेज है, पर ब्लॉग की दुनिया में ये मेरा पहला पन्ना (पेज ) है, और  एक नये सफर की शुरुआत भी।  कोशिश रहेगी कि कहानियों , कविताओं  में रचे-बसे आप -बीती और जग-बीती के धागों से जीवन के रंगबिरंगे पन्नों को एक साथ बुन लिया जाये, और जो  बुनावट सामने आएगी उसमें अक़्स होगा आपका , मेरा , हम सभी का।  मेरे ज़ेहन से निकल कर  ब्लॉग के पन्नों पर उतरे ये शब्द  , बस बानगी भर हैं ये याद दिलवाने के कि चाहे कितने ही झंझावात आयें , जिन्दगी की इस किताब को सुनहले कसीदों से काढ़ना और खूबसूरती से सजाना सिर्फ़ हमारे अपने हाथ में है।  क्यूंकि मुरझाये फूल फिर से खिल उठते हैं , टूटी उम्मीदें फिर से जुड़ जाती है  और अगले ही क्षण ख़ुशी से भरी आँखों में आंसुओं का समंदर  तैरने लगता है। तो क्या तैयार हैं आप इस ख़ूबसूरत किताब को लिखने के लिए।  चलिए आज इस सफर का आगाज़ करते हैं... 

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